कविता शायरी 

दोस्ती

बीत गये वो दिन,
गुज़र गये कुछ साल।
खोज ख़बर नही उसकी,
जाने कैसा होगा मेरा यार।।

भूला नहीं हूँ तुझको,
बस उलझ गया हूँ यार।
बात नहीं अब पहले जैसी,
बस निभा रहा हूँ किरदार।।

समय गुज़र जाता है,
पर कुछ पल हैं जो गुज़रे नहीं।
जैसे कल की ही वो बात हो,
जब हम दोनों का साथ हो।।

ये यादें ही तो हैं जो,
मुझमें तुझको ज़िंदा रखें।
ये समय बावला क्या जाने,
जो पल में इसका उसका हो।।

दिल से बंधी ये ऐसी डोर,
खींचे मुझे बस तेरी ओर।
राहें जुदा हों या खफ़ा,
अमर रहे ये दोस्ती सदा।।

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